म आदेशों की अवहलेना की जाती है।गौरतलब है कि दिल्ली नगर निगम द्वारा कुछ महीने पहले ये आदेश पारित किया गया था कि राजधानी दिल्ली की दीवारों को पोस्टर से गंदा करने वालों पर कम से कम 5 हजार रूपये का जुर्माना या फिर एक साल की कैद की सजा हो सकती है। इस आदेश की बाबत विभिन्न अखबारों एवं एफएम चैनलों द्वारा लगभग रोज ही विज्ञापन प्रकाशित होते रहते हैं। पर सही मायनों में देखा जाए तो इस आदेश की अवहेलना करने वाले ही निगम के पार्षद हैं। दिल्ली की शायद ही कोई ऐसी सड़क बची हो जिसकी दीवारों पर किसी न किसी निगम पार्षद या फिर उसके समर्थक के पोस्टर न चिपके हों। विभिन्न त्यौहारों की शुभकानाएं हो या फिर कोई पद मिलने पर बधाई, इस तरह के तमाम पोस्टर्स आपको निगम के अध्यादेश का मखौल उड़ाते मिल जाते हैं। निगम के संबंधित अधिकारियों के पास पोस्टर चिपकाने वालों के खिलाफ अधिकार तो हैं पर वो किसी भी निगम पार्षद पर हाथ डालकर अपनी नौकरी को खतरे में नहीं डालना चाहते। दिल्ली में सबसे ज्यादा पोस्टर भी नगर निगम के मुख्यालय टाउन हाॅल व आसपास के इलाकों में ही चिपके दिखाई पड़ जाते हैं। लेकिन इसे निगम अधिकारियों की विवशता कहें या फिर अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही, परंतु इतना तो तय है कि हमारे देश में कोई भी कानून तोड़ने के लिए ही बनाया जाता है और कानून बनाने वाले हमेशा कानून से बढ़कर हो जाते हैं।


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